वो मुझसे मेरे दर्द का हिसाब मांगता है,
जिसे दाग़-ए-उल्फ़त बाद कमाया मैने।
कौन कहता है कुछ नही है मेरे घर में?
जबकि याद-ए-दोस्त घर सजाया मैंने।।
×××
©पुरुषोत्तम


वो मुझसे मेरे दर्द का हिसाब मांगता है,
जिसे दाग़-ए-उल्फ़त बाद कमाया मैने।
कौन कहता है कुछ नही है मेरे घर में?
जबकि याद-ए-दोस्त घर सजाया मैंने।।
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©पुरुषोत्तम