तुम्हारे आने की खबर सबको सुनाऊंँ

तेरा ही नाम लेकर मैं झूमूँ नाचू गाऊंँ


घर-आंँगन सजाऊंँ मैं दीपक जलाऊंँ

खुशी इतनी की मैं रब को भूल जाऊंँ


बड़ी उलझन में हूंँ पिया आज मैं तो

खुद को संवारूंँ या तुमको निहारूंँ


 एक नए आसमान में उड़ रही हूंँ मैं

मन कर रहा है तुम्हें जोर से पुकारूंँ


और जब तुम मेरे करीब आ जाओ

अपने होंठ तुम्हारे माथे पर सजा दूंँ


इतने दिन दूर रहकर बहुत तरसी मैं 

मन मेरा आज तुझको भी ललचाऊँ 


एक-दूजे के बिना जितने पल बीते

कुछ सुनूंँ तुमसे कुछ तुमको सुनाऊँ


तुम्हें रोक लूँ अपने पास सदा के लिए

दूर जो जाना चाहो सीने से लगा लूंँ

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©पुरुषोत्तम