तेरी यादों की धुंध छटे तो दिल का मौसम साफ हो
नया आसमान मिले मन परिंदे का नया परवाज हो
नए मौसम में नव गीत गुनगुनाए हम नया साज हो
कोई हमसफर मिले नया वही हमनवा हमराज हो
रब से दुआ है तेरी जिन्दगी में भी नई शुरुआत हो
तुम्हे भी मिले नया कोई जो कल होना है आज हो
कभी मिलना मुझे तो कोई गिला शिकवा न रखना
आज कह दो सबकुछ मन में दबे जितने भी राज हो
आंँगन में फुदके मैना मुंडेर से कौआ संदेशा सुनाए
बागों को तितलियाँ सजाए भंँवरों की आवाज हो
जुगनू करे मेरा घर रोशन कोई चिड़िया दाना लाए
और कुछ नहीं कुदरत का इतना मुझपे नवाज हो
"पुरु" कोई प्रेयसी मिले ऐसी जिसे मुझपर नाज हो
नया यार मिले मेरे नए पुराने हर दर्द का इलाज हो
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©पुरुषोत्तम


