कल जो चार अक्षर पढ़ चुके,
आज तुमको पढ़ने से रोकेंगे।
तय कर लो तुम भी पढ़ने का,
नीली स्याही सबको पोतेंगे।।
पढ़- लिख कर काबिल बनेंगे,
शब्द गोली कलम बंदूक करेंगे।
जब शिक्षित हो जायेंगे सारे,
फिर आज नहीं तो कल रोंदेगे।।
हम नेक बनेंगे नेक करेंगे,
हक की बातें हक से लेंगे।
राहों में आएंगे रोड़ा बनने,
हम बेवजह नहीं उलझेंगे।।
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©पुरुषोत्तम


