राह सुगम हो चाहे दुर्गम कितना भी
स्वप्नों की आहुति मुझे स्वीकार नहीं।
अशांति में भी करे सतत् प्रयास जो
देता अपने स्वप्नों को आकार वही।।
×××
©पुरुषोत्तम


राह सुगम हो चाहे दुर्गम कितना भी
स्वप्नों की आहुति मुझे स्वीकार नहीं।
अशांति में भी करे सतत् प्रयास जो
देता अपने स्वप्नों को आकार वही।।
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©पुरुषोत्तम