भोर-भोर सूरज की किरणें माधुर्य लपेटे
जब मेरी प्रेयसी को छूती होगी,
सौंदर्य की मूरत से मिल रोशनी
अपने भाग्य पर कितना इतराता होगा।
×××
©पुरुषोत्तम


भोर-भोर सूरज की किरणें माधुर्य लपेटे
जब मेरी प्रेयसी को छूती होगी,
सौंदर्य की मूरत से मिल रोशनी
अपने भाग्य पर कितना इतराता होगा।
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©पुरुषोत्तम