ऊपर वाले की खूबसूरत कृति है स्त्री और पुरुष
एक दूसरे का प्राकृतिक पूरक है स्त्री और पुरुष
पुरुष को पुरुषत्व का बोध कराती है एक स्त्री
जबकि हर पुरुष में छिपी होती है एक स्त्री
और स्त्री को स्त्रीत्व का बोध कराता है एक पुरुष
जबकि हर स्त्री में छुपा होता है एक पुरुष
प्रकृति भी उस वक्त खुशी से झूम उठती है
जब खुद से खुद को मिलाता है स्त्री और पुरुष
©पुरुषोत्तम


