अचानक चांदनी बिखरी है फिज़ाओं में,
शायद उसने चेहरे से नकाब हटाया होगा।
आज सौंधी सी खुशबू घुली है फिज़ाओं में,
शायद उसने जुल्फ़ों को लहराया होगा।
मेरी धड़कन इतनी तेज़ क्यों धड़क रही है,
शायद उसने अपना पायल छनकाया होगा।
मेरे होंठ खुद ही क्यों बड़बड़ाने लागे हैं,
शायद उसने मुझे आवाज लगाया होगा।
पानी का ग्लास क्यों छूट गया हाथ से,
शायद उसे जोर की प्यास लगी होगी।
एकदम से गले से किसने लगाया मुझको,
शायद वहां जोर की बिजली कड़की होगी।
आज खुले में नहाने का मन क्यों कर रहा है,
शायद वहां झमाझम बारिश हुई होगी।
ये पानी इतना शीतल क्यों है,
शायद उसने हीं इसे छुआ होगा।
इतनी मधुर संगीत कहां से आ रही है,
शायद उसने कुछ गुनगुनाया होगा।
इन पत्तों में सरसराहट क्यों हो रही है,
शायद उसे कोई शरारत सूझी होगी।
ये हंसने की आवाज कहां से आ रही है,
शायद उसे मेरी कोई बात याद आई होगी।
आज सूरज इतना लाल क्यों नजर आ रहा है,
शायद उसे मुझपर गुस्सा आया होगा।
ये डांटने की आवाज कहां से आ रही है,
शायद उसे मुझपर प्यार आया होगा।
ये कोन मेरी तरफ दौड़ी चली आ रही है,
शायद उसे मेरा ख्याल आया होगा।
शायद उसे मुझपर प्यार आया होगा।
शायद उसे मुझपर प्यार आया होगा।
©पुरुषोत्तम


