झूठ की घास 

कबतक दबाए रखेगा

सच की दूब को

समय का अंतर मात्र है

जिस दिन उसके हिस्से की 

मिट्टी पानी हवा सूरज और आकाश मिलेगा

बाहर आ हीं जाएगा।

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©पुरुषोत्तम