झूठ की घास
कबतक दबाए रखेगा
सच की दूब को
समय का अंतर मात्र है
जिस दिन उसके हिस्से की
मिट्टी पानी हवा सूरज और आकाश मिलेगा
बाहर आ हीं जाएगा।
×××
©पुरुषोत्तम


झूठ की घास
कबतक दबाए रखेगा
सच की दूब को
समय का अंतर मात्र है
जिस दिन उसके हिस्से की
मिट्टी पानी हवा सूरज और आकाश मिलेगा
बाहर आ हीं जाएगा।
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©पुरुषोत्तम