मायावी दुनिया है यहांँ और रिश्ते कांँच के

सच्ची है सिर्फ आंँखों में बसी यादें मित के


रिश्ते टूट जाते हैं कि दुनिया छूट जाती है

दुनिया छूट जाती है कि रिश्ते टूट जाते हैं


अक्सर आंँखों से अश्रु धारा फूट जाती है

ये आंँखें हसीं यादों का मंजर लूट जाती है


रिश्ते टूट जाते हैं कि दुनिया छूट जाती है

दुनिया छूट जाती है कि रिश्ते टूट जाते हैं

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©पुरुषोत्तम