क्या हुआ जो कोई साथ नहीं मेरे
यूंँ हीं रौशन जमाना होता चला गया।
मंजिल पाने की मेरी ललक देख
रास्ता खुद राह दिखता चला गया।।
×××
©पुरुषोत्तम


क्या हुआ जो कोई साथ नहीं मेरे
यूंँ हीं रौशन जमाना होता चला गया।
मंजिल पाने की मेरी ललक देख
रास्ता खुद राह दिखता चला गया।।
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©पुरुषोत्तम