सीने से लगाकर रुँधे गले से तुमने कहा था,
"पुरू" आपकी बेरुखी मुझे बहुत खलती है !
तब तुम्हें कसकर अपने बाहों में भींच लिया था,
तुम्हारे वो शब्द मेरे कानों में आज भी गूंजती है !
और मेरे अन्तर्मन को चीर कर रख देती है !!
~पुरुषोत्तम©


सीने से लगाकर रुँधे गले से तुमने कहा था,
"पुरू" आपकी बेरुखी मुझे बहुत खलती है !
तब तुम्हें कसकर अपने बाहों में भींच लिया था,
तुम्हारे वो शब्द मेरे कानों में आज भी गूंजती है !
और मेरे अन्तर्मन को चीर कर रख देती है !!
~पुरुषोत्तम©