उस पहाड़ सदृश हृदय के बीचप्रेम की नदी बहती हैजो संतान के समक्ष आनेवालेतमाम दुःखों के पेड़ हटा करउसके जीवन में सतरंगी सुंदरताभर देते हैं... मेरे पूज्य पिताजी।
उस पहाड़ सदृश हृदय के बीचप्रेम की नदी बहती है
जो संतान के समक्ष आनेवालेतमाम दुःखों के पेड़ हटा कर
उसके जीवन में सतरंगी सुंदरताभर देते हैं... मेरे पूज्य पिताजी।