#कोरोना_काल_और_आत्मनिर्भरता
बगावत नहीं किया उसने #आत्मनिर्भर बनना स्वीकार किया
नियती पर छोड़ सबकुछ अपने मंजिल को प्रस्थान किया
मिलों चलना था उसे राशन जितना था उसने बान्ध लिया
आम आदमी था साहब कोई साईकिल कोई टेंकर तो किसीने कोई और जुगाड़ किया
बहुतों ने तो पैदल हीं धरती नाप दिया
थके हुए बच्चे ने पहिये वाली अटैंची पर भी सवार किया
माँ के पैरों मे गिर पड़े चंडाल धूप ने फिर भी ना रहम किया
बैल की जगह खुद जूते ना कोई उसने सवाल किया
हिम्मत मिले जिनके रिश्ते-नाते सड़कों और पटरियों को अपने लहू से सिंच दिया
राह चलते-चलते हुई प्रशव-पीड़ा माँ बनने का सुख भी मिला
बगावत नहीं किया उसने आत्मनिर्भर बनना स्वीकार किया
हे #भारत_के_भूप बीस लाख करोड़ का तुमने क्यूँ अहसान किया।।
पुरुषोत्तम

