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मुझे डर है


मुझे डर है कि मैं अपना ख्वाब ना खो दूंँ,सुनहरे कल के खातिर आज ना खो दूंँ।।

जो इस तरह तेरी हांँ में हांँ मिलता रहा,एक दिन मैं अपने आप को ना खो दूंँ।।

××שपुरुषोत्तम

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