यादों के सागर में कब तक गोता लगाता रहूंँ,

कभी मुझसे मिलने आओ तो कुछ बात बने।


एक दूजे से लिपटकर जो कहना है कह देंगे,

फिर चाहे आंँखों से जितना भी जज्बात बहे।

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©पुरुषोत्तम