प्यार को जब वो जिश्म से तौलते हैं,

मेरे अश्क मुझसे ज्यादा बोलते हैं।१।


जब-जब वो मेरे हुस्न को रौंदते हैं ,

मेरे अश्क मुझसे ज्यादा बोलते हैं।२।


मेरे अरमानों का जब गला घोटते हैं,

मेरे अश्क मुझसे ज्यादा बोलते हैं।३।


हर बार जब मेरे जज्बात से खेलते हैं,

मेरे अश्क मुझसे ज्यादा बोलते हैं।४।


वो इस बारे में क्यों ना सोचते हैं,

मेरे अश्क मुझसे ज्यादा बोलते हैं।५।


~पुरुषोत्तम