धूप-छांव, आंधी-बारिश, सर्दी-गर्मी से बेपरवाह हम

उस सूर्य की तरह अनवरत चलता रहता है ये दस्तूर।

राष्ट्रनिर्माण के नायक हम, हम श्रमिक हम्हीं श्रमविर

बावजूद इसके कोई श्रेय नहीं कहलाते सिर्फ मजदूर।

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©पुरुषोत्तम