जब सँ सजन अहाँ गेलों परदेश यो

याद मे दिन-राईत हमर जरई करेज यो

एक बरिस बित गेल नै ऐलों अहाँ अंगना

खन-खन खनकैत बुलाबे हमर कंगना


अहिं दिस रहे हमर हरदम धियान यो

जी घबराबै हमर रहै अटकल प्राण यो

अखनो नजैर में चमके अहाँ केर बिंदिया

मुन व्याकुल छल याद में, आबै नै निंदिया


मीठ-मीठ बात सँ पिया आब नै बहकाबू

काम-काज छोईर पिया फगुआ में आबू

हलुआ पूरी और मालपुआ खियायब

करब खूब सेवा-सत्कार, यो फगुआ में आबू


सुइन के बात हमरा रहलो नै जाय यो

छन-छन पैजनी लागै हमरे बुलाए यो

नुंगा सग किनलों आ रंग-अबीर-पिचकारी

सजनी फगुआ से पहिने हम धईर लेलों गाड़ी


~पुरुषोत्तम