ये जो आंँखों का लोर है न,दरसअल रिश्तों की डोर है।जब भीमैंतुमसेदूर जाना चाहातुम्हारे इनआंँसुओं नेमुझे रोकाइनसे कहोअपनी पकड़ढीली कर देमुझे घुटन हो रही है।××ש पुरुषोत्तम
ये जो आंँखों का लोर है न,दरसअल रिश्तों की डोर है।
जब भीमैंतुमसेदूर जाना चाहातुम्हारे इनआंँसुओं नेमुझे रोकाइनसे कहोअपनी पकड़ढीली कर देमुझे घुटन हो रही है।××ש पुरुषोत्तम