Poetry 1 min read 791.6K reads

लोर(आँसू)


ये जो आंँखों का लोर है न,दरसअल रिश्तों की डोर है।

जब भीमैंतुमसेदूर जाना चाहातुम्हारे इनआंँसुओं नेमुझे रोकाइनसे कहोअपनी पकड़ढीली कर देमुझे घुटन हो रही है।××ש पुरुषोत्तम

Read more Earn more Learn more