लोग बेवजह बातों को तूल देते हैं,
फूल तो दे नही सकते शूल देते हैं।
सुलझा सकता था सिर्फ गुफ्तगू से,
जाने क्यूंँ लड़ने को उसूल कहते हैं।
×××
©पुरुषोत्तम


लोग बेवजह बातों को तूल देते हैं,
फूल तो दे नही सकते शूल देते हैं।
सुलझा सकता था सिर्फ गुफ्तगू से,
जाने क्यूंँ लड़ने को उसूल कहते हैं।
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©पुरुषोत्तम