लोग बेवजह बातों को तूल देते हैं,

फूल तो दे नही सकते शूल देते हैं।


सुलझा सकता था सिर्फ गुफ्तगू से,

जाने क्यूंँ लड़ने को उसूल कहते हैं।

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©पुरुषोत्तम