कहीं सो ना जाऊंँ चिरनिद्रा में मुझे जगा दो,
तप रहा बदन मेरा आओ स्नेह लेप लगा दो।
की आज तुम कुछ ऐसा करो मेरे साकिया,
कोई जाम दो ऐसा की मेरा मन भीगा दो।।
×××
©पुरुषोत्तम


कहीं सो ना जाऊंँ चिरनिद्रा में मुझे जगा दो,
तप रहा बदन मेरा आओ स्नेह लेप लगा दो।
की आज तुम कुछ ऐसा करो मेरे साकिया,
कोई जाम दो ऐसा की मेरा मन भीगा दो।।
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©पुरुषोत्तम