आया ये कैसा रोग कोरोना

कर दिया मुश्किल जीना


हाय-हाय कर होड़ में लगे थे सब 

टुकुर-टुकुर ताक रहे अनाज दाना


नींद नहीं आती अब किसीको

बेकार पड़े हैं तकिया बिछौना


जो लोग घूमते थे शान से 

अब हैं डरे सहमे भयभीत


एक-दूजे को छूने से बच रहे 

सब के सब हो गए अछूत


जानता का फिक्र छोड़ सत्ता लोभी मंत्री संतरी

चुनाव प्रचार में लगी है निकम्मी सरकार 


अंदर सबके पसरा है बिल्कुल सन्नाटा

चारो ओर से आ रही बस चीख पुकार


धू-धू कर जल रही अनगिनत लाशें

समूचा इलाका दिख रहा श्मशान


स्वार्थ सिद्धि में मानव बन बैठा शैतान

कहाँ है तू अब तुम्हीं रक्षा करो भगवान