तेरी आंखों की चमक बता रही
तुम कितना बैचैन थी मेरे लिए
आओ ना गले लग जाओ प्रिय
अब तुम्हारे सामने हूंँ फिर क्यों
खड़ी हो होंठों पर खामोशी लिए
×××
©पुरुषोत्तम


तेरी आंखों की चमक बता रही
तुम कितना बैचैन थी मेरे लिए
आओ ना गले लग जाओ प्रिय
अब तुम्हारे सामने हूंँ फिर क्यों
खड़ी हो होंठों पर खामोशी लिए
×××
©पुरुषोत्तम