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खामोशी


तेरी आंखों की चमक बता रहीतुम कितना बैचैन थी मेरे लिएआओ ना गले लग जाओ प्रियअब तुम्हारे सामने हूंँ फिर क्योंखड़ी हो होंठों पर खामोशी लिए××שपुरुषोत्तम

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