कहांँ गया पनघट सारा, कहांँ गई पनघट की गोरी
कहांँ गया वो यार दोस्त, कहांँ गई हंँसी ठिठोली
कहाँ गई सावन की मस्ती, कहांँ गया फाग फुहार
कहांँ गया मेहमान नवाजी, कहांँ गया आदर सत्कार
कहांँ गया मांँ का आंँचल, कहांँ गया पिता का प्यार
कहांँ गया भजन कीर्तन, कहांँ गया डोली कहार
कहांँ गया मंदिर मस्जिद, कहांँ गई आरती की थाल
कहांँ गया अक्षत चरणामृत, कहांँ गया तिलक भाल
कहांँ गया भाला और भरछी, कहांँ गया धनुष बाण
कहांँ गए गुरु गुरुकुल सारे, कहांँ गया वेद पुराण
कहांँ गया हाट और मेला, कहांँ गया चाट का ठेला
कहांँ गया नेता का भाषण, कहांँ गया भाषण का रेला
कहांँ गया कुल्हड़ मटका, कहांँ गया घंटाघर और घंटा
कहांँ गया बैल का रुनझुन, कहांँ गया घोड़े का टाप
कहांँ गया जाता, और कहांँ गया उखड़ी समाठ
कहांँ गया धोती कुर्ता, कहांँ गया गांँती का गांँठ
कहांँ गया पगड़ी सर का, और कहांँ गया खराम
कहांँ गया बाग बगीचा, कहांँ गया आम लताम
कहांँ गया चिट्ठी पत्री, कहांँ गया वो संवादिया
कहांँ गया नाव सारा, कहांँ गया सब खेवईया
कहांँ गया मचान दलान, कहांँ गया थान बथान
कहांँ गया दूध दही, और कहांँ गया वो खान पान
कहांँ गया दउरी धम्मा, कहांँ गया खटिया मचिया
कहांँ गया गुल्ली डंडा, और कहांँ गया गुड्डा गुडिया
कहांँ गया सरकस l झूला, कहांँ गया खेल खिलौना
कहांँ गया गाय और बकरी, कहांँ गया कौआ मैना
कहांँ गया बरगद तुलसी, कहांँ गया नीम का पेड़
कहांँ गया पगडंडी, जहांँ नंगे पांँव लगाते थे दौड़
कहांँ गया लालटेन डिबिया, कहांँ गया पोथी बस्ता
कहांँ गया गांँव, और कहांँ गया उस गांँव का रस्ता
कहांँ गया जादू टोना, कहांँ गया भूल भुलैया
कहांँ गए चाचा मामा मौसा फूफा और भैया
कहांँ गया खेत खलिहान, कहांँ गया जिम्मेदारी
कहांँ गए दादा नाना, और उनके पीठ की सवारी
कहांँ गई दादी नानी, कहांँ गए किस्सा कहानी
कहांँ गया वो बचपन, कहांँ गया वो सब नादानी
कहांँ गया पनघट सारे, कहांँ गई पनघट की गोरी
कहांँ गया वो यार दोस्त, कहांँ गई हंँसी ठिठोली
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©पुरुषोत्तम


