बचपन और जवानी बीता,अलग सी रही है ज़िन्दगी।हंसता-खेलता जीवन थापलक झपकते ही देखो,जिम्मेदारियों के बोझ तले,सुलग सी रही है ज़िन्दगी।
बचपन और जवानी बीता,अलग सी रही है ज़िन्दगी।
हंसता-खेलता जीवन थापलक झपकते ही देखो,
जिम्मेदारियों के बोझ तले,सुलग सी रही है ज़िन्दगी।