बचपन और जवानी बीता,
अलग सी रही है ज़िन्दगी।
हंसता-खेलता जीवन था
पलक झपकते ही देखो,
जिम्मेदारियों के बोझ तले,
सुलग सी रही है ज़िन्दगी।
~पुरुषोत्तम


बचपन और जवानी बीता,
अलग सी रही है ज़िन्दगी।
हंसता-खेलता जीवन था
पलक झपकते ही देखो,
जिम्मेदारियों के बोझ तले,
सुलग सी रही है ज़िन्दगी।
~पुरुषोत्तम