बिना काम के अब मुलाकात कौन करता है
बिना पाप किए अब ज़कात कौन करता है
मिलते ही सीने से लगा लब चूम लेते हैं लोग
इश्क़ में अब आंँखों से बात कौन करता है
×××
©पुरुषोत्तम


बिना काम के अब मुलाकात कौन करता है
बिना पाप किए अब ज़कात कौन करता है
मिलते ही सीने से लगा लब चूम लेते हैं लोग
इश्क़ में अब आंँखों से बात कौन करता है
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©पुरुषोत्तम