इश्क़! आखिर क्या बला है इश्क़


पूनम रात की शीतल चांदनी है इश्क़

सूरज की धधकती आग है इश्क़

तानसेन का राग है इश्क़


        एक दूसरे में खो जाने का दस्तूर है इश्क़

        पल में हो जाए छूमंतर वो कपूर है इश्क़

        कीमत चाहे जो भी हो मंजूर है इश्क़


झरनों की अनवरत संगीत है इश्क़

भाए मन को वो मनमीत है इश्क़

पत्थर है मगर नवनीत है इश्क़


        प्रकृति की अनमोल जवानी है इश्क़

        जोड़ो का मासूम नादानी है इश्क़

        एकदुजे की निगरानी है इश्क़


श्याम की चाह में मीरा दीवानी है इश्क़

समंदर के लहरों की रवानी है इश्क़

मेरी तुम्हारी और हमारी कहानी है इश्क़


        लगा लूं होंठो से वो प्याली है इश्क़

        धरती पर फैली हरियाली है इश्क़

        हर नवजात की किलकारी है इश्क़


धैर्य, जुनून और खयाली है इश्क़

शिमला, कुल्लू और मनाली है इश्क़

सचमुच बहुत निराली है इश्क़


        कुशाग्र है लेकिन कुंद है इश्क़

        तरसे पपीहा, स्वाति की वो बूंद है इश्क़

        ब्रह्मलीन हो जाने के मानिंद है इश्क़


मिलने बिछड़ने का दो खुंट है इश्क़

हुआ मुकम्मल तो ठीक वरना

मीठी यादों का कड़वा घूंट है इश्क़


~पुरुषोत्तम