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होंठ


तलब लगी थी पीने की रात भर खाक छानता रहा।

मयखाना भी मिटा ना सका तिश्नगी मेरा ।

तेरे लबों को छूकर लब से, मैं लबालब हो गया ।।

— #purushottam
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