नैन से नैन मिले प्रेम-पुष्प खिल उठे

होंठ मुस्काए दिल अंदर तक भेद गए

पल में हीं ना जाने कितने भाव जगे

कैसे बताऊं मन में कितने स्वप्न सजे

एक हीं क्षण में सब बदल गया और

मन हीं मन हम एक दूजे के हो गए।

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©पुरुषोत्तम