दर्द तब और भी बढ़ जाता है,

तुम पास हो मेरे और सर पर

दुलार भरा हाथ नहीं पाता हूंँ।


दर्द तब और भी बढ़ जाता है,

चोट मुझे लगी हो और

आंखों में आंँसू तुम्हारे आ जाय।


दर्द तब और भी बढ़ जाता है,

मैं दर्द से गुजर रहा होऊं और

सिसकियांँ तुम्हारी सुनाई दे जाय।


दर्द तब और भी बढ़ जाता है,

मेरे आंँखों के सामने तुम्हारा

उदास चेहरा नजर आ जाय।


दर्द तब और भी बढ़ जाता है,

लाख कोशिशों के बावजूद भी

जब मैं दर्द छुपा नहीं पाता हूंँ ।

×××


© पुरुषोत्तम