हम सारा दिन इस इंतजार में थे कि मोहब्बत भरी बातें होगी,

देर रात कॉल आया, मैं busy था वो फोन बंद करके सो गई।


अगली सुबह कॉल उठाते हीं पूछा, कहां busy थे सारी रात,

उत्तर में कुछ कह पाता उससे पहले ही शीत युद्ध शुरु हो गई।


तमाम तरह के ताने सुने उलहाने सुने पर जी नही भरा उसका,

आंँखों से जो निकली आंँसू की धारा गंगा यमुना में बदल गई।


मोहब्बत जो बचानी थी मुझे, मैं बेचारा भला करता भी क्या,

बाबू शोना जानू हनी बहुत किया नहीं मानी फिर रात हो गई।


चॉकलेट बहुत पसंद है उसे, कभी उसने ही बतलाया था मुझे,

मिलने पर ढेर सारा चॉकलेट देने का वादा किया वो मान गई।

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©पुरुषोत्तम