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बिहार ले चल


जहाँ सुकून मिले मुझे उस संसार ले चलअगले जन्म भी रहूंँगा मैं बलिहार ले चल

छठ पर्व है मेरा तन यहांँ है और मन वहांँअच्छा यही रहेगा मुझे भी बिहार ले चल××שपुरुषोत्तम

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