आशिकों का है अंजाम कुछ ऐसा,

जैसे घी और शहद में डूबा मख्खी।

बावजूद कोशिशों के उड़ नहीं पाता,

अन्ततः है निकाल फेंक दिया जाता।


~पुरुषोत्तम