अच्छा हीं हुआ जो तुम अब साथ नहीं हो मेरे,
करेंगे पूरा जो भुल चुके अपना सारा कामकाज थे!
सात जन्मों के लिए साथ निभाने का वादा कर तुमने,
साथ तब छोड़ा जब मिलने लगे हमारे सारे खयालात थे!
इस कदर डूब चुका था उस वक्त मैं इश्क़ में तेरे,
कभी ध्यान नहीं दिया चारो तरफ खुले आसमान थे!
तुम ही बोलो "पुरु" क्या नहीं किया तुम्हारे लिए,
यहाँ तक कि बदल गया जीने के अपने अंदाज थे!
पिज्जा बर्गर मोमोज चाउमिन सब कुछ खिलाया तुम्हें,
पैसे बचाने के लिए कई बार खुद खाए सूखे अनाज थे!
तब भी बातें किया जागकर तुमसे सारी-सारी रात,
जब घर वाले साथ होते और निकलते नहीं अल्फ़ाज़ थे!
तुम्हारे वापस आने की उम्मीद छोड़े अरसा बीत गया,
अब तो भूल चुका हुंँ तुमसे जुड़े जितने भी जज्बात थे!
वो तो तेरे इश्क़ ने अपाहिज बना दिया था मुझे,
वरना किसी जमाने में हम भी बड़े उड़नबाज थे!
अब तो ठान लिया है अकेले मंजिल तय करने का,
जिसे भी शामिल किया सफर में सब दगाबाज थे!
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©पुरुषोत्तम


