तेरी आखों की गहराई का अंदाजा न था मुझको,

नजरें मिलाने का गुस्ताखी कर लिया ।


तैरना तो आता था मुझको, लेकिन

तेरी पलकों के थपेरे ने तैराकी भुला दिया।


कहाँ! किनारे की खोज में निकला था मैं,

कहाँ! समंदर में जा मिला।।


~पुरुषोत्तम