आना है तो खुलकर आओ, छुपन छुपाई में क्या रक्खा है।

मेरी जान चाहिए, तो फिर ले जाओ, हथेली पर रक्खा है।।


मेरे दोस्त दावत में आए हो तो दावत उड़ाओ मत घबराओ।

क्या सोचते हो जहर है इसमें, नहीं है, मैने खुद चक्खा है।।

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©पुरुषोत्तम