अब तक उदास हो खुद को संवारा नहीं !
लगता है अब तक किसी ने पुकारा नहीं !!
दर पर आया हूं तो ठुकरा मत देना !
आशिक़ हूं तेरा, मैं कोई आवारा नहीं !!
लव क्यों सिले हैं तुम्हारे, कुछ तो बोलो !
मुझको तेरी ये खामोशी गंवारा नहीं !!
~पुरुषोत्तम


अब तक उदास हो खुद को संवारा नहीं !
लगता है अब तक किसी ने पुकारा नहीं !!
दर पर आया हूं तो ठुकरा मत देना !
आशिक़ हूं तेरा, मैं कोई आवारा नहीं !!
लव क्यों सिले हैं तुम्हारे, कुछ तो बोलो !
मुझको तेरी ये खामोशी गंवारा नहीं !!
~पुरुषोत्तम