जब प्यार हुआ तो हुए गुलजार,
और दिल टूटा तो रोए जार-जार।
अब भी बाकी था रस्म-ए-जुदाई,
मिलने को दोनों हीं हुए बेकरार।।
×××
©पुरुषोत्तम


जब प्यार हुआ तो हुए गुलजार,
और दिल टूटा तो रोए जार-जार।
अब भी बाकी था रस्म-ए-जुदाई,
मिलने को दोनों हीं हुए बेकरार।।
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©पुरुषोत्तम