जब प्यार हुआ तो हुए गुलजार,

और दिल टूटा तो रोए जार-जार।

अब भी बाकी था रस्म-ए-जुदाई,

मिलने को दोनों हीं हुए बेकरार।।

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©पुरुषोत्तम