तुम कौन हो ?
कयूं मौन हो ?
क्या तेरे सवाल हैं ?
क्या तेरे ख्याल हैं?
कुछ तो बोलो !
लब अपना खोलो !
क्यूँ हाथ धरे बैठे हो ?
किस चिंता में खोए हो ?
अच्छा ! खुद की खोज में निकले हो ?
तो , कहाँ तलक पहुंचे हो ?
कर पाए कुबूल खुद को ?
या,अब भी दुनिया-दारी में उलझे हो ?


