अल्हड़ सी मुस्कान 

होठों पर रखकर ,

सफर की काँटों से 

मंज़िल की खुशबू निचोड़कर !

वक़्त की बंदिशों से बेपरवाह ,

मैं चलता रहा , मैं चलता रहा । 


आँखों की आंसुओं से 

मन की प्यास बुझाकर ,

रात की तन्हाइयों में 

तन्हाई का साथ पाकर !

जीवन से अंजान ,

मैं चलता रहा , मैं चलता रहा। 


आइनों से दुश्मनी मोल ले ,

तस्वीरों से इश्क़ जताकर !

दूसरों के नींद औ सुकूं के लिए 

अपने सारे ख़्वाब रौंदकर !

खुद को भूल बैठ कहीं ,

मैं चलता रहा, मैं जलता रहा....... मैं जलता रहा .........................!