कब तक रहें तेरे दीद के प्यासे हम 

कब तक बस तेरी तस्वीर निहारें हम ।

कभी वक़्त मिले तो बता देना 

कब तक तुझे पुकारें हम।


है कुछ दिल की ख्वाहिशें 

कभी तेरे जुल्फ संवारें हम 

कभी तेरे आँखों में देखते 

कुछ इश्क़ के पल गुजारे हम ।


तुम्हें बेशक़ न हों याद पर ,

तुम्हारे कॉलेज जाने के रस्ते में 

मेरा घर भी पड़ता था 

जहाँ तुम करती थी इन्तजार बस का 

कोई तुम्हारा इन्तजार करता था

यूं हीं बेबस तेरे इन्तजार में 

कितने और दिन गुजारे हम 

कभी वक़्त मिले तो बता देना 

कब तक तुझे पुकारे हम ।।