ख्वाब,सुकून ,उम्मीदें सब तेरे नाम कर दी है
फिर भी जाने क्यूँ तुममे , इश्क़ का एहसास नहीं है।
मैं बुलंदियों से होकर आया हूँ
वहाँ भी हैं कील-पत्थरें , जगह वो भी कुछ खास नहीं है।
दरिया तुम न देखो यूं मेरी ओर
मैं समंदर हूँ , मुझमें कोई प्यास नहीं है ।


ख्वाब,सुकून ,उम्मीदें सब तेरे नाम कर दी है
फिर भी जाने क्यूँ तुममे , इश्क़ का एहसास नहीं है।
मैं बुलंदियों से होकर आया हूँ
वहाँ भी हैं कील-पत्थरें , जगह वो भी कुछ खास नहीं है।
दरिया तुम न देखो यूं मेरी ओर
मैं समंदर हूँ , मुझमें कोई प्यास नहीं है ।