धुप की बरसात में
आलस्य की हर बात में
हम पसीने की कहानी लिखेंगे
हम आग में पानी लिखेंगे।।
न पेड़ हो ,न छांव हो
न तिनका कोई न नाव हो
हम तैरकर समंदर
लहरों की रवानी लिखेंगे
हम आग में पानी लिखेंगे।।
हर सफर में हमसफ़र हो
है ये जरुरी नहीं
अपना हाथ खुद पकड़
पैरों की जवानी लिखेंगे
हम आग में पानी लिखेंगे।।
हार , हार , हार पर
जूनून का वार कर
धैर्य से काम ले
अपने खुदा का नाम ले
जीत की कहानी लिखेंगे
हम आग में पानी लिखेंगे।।


