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आंखें


दहलीज से कोई थोड़ी न वापस जाता हैजो आ जाए तो फिर कहां वापस जा पाता है ।

आंखें कैद कर लेती है उसी एक चेहरे कोमुकद्दर का जिससे दिल नहीं लग पाता है ।।

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