
सब रो रहे थे सीना पीट पीट कर ,
ले रहे थे उसके दुख की थाह
वो बैठी थी जैसे कोई शीतल लहर
या जैसे बिन हल चल के शांत राह
क्यों विलाप करे वो , क्यों बहाये
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सब रो रहे थे सीना पीट पीट कर ,
ले रहे थे उसके दुख की थाह
वो बैठी थी जैसे कोई शीतल लहर
या जैसे बिन हल चल के शांत राह
क्यों विलाप करे वो , क्यों बहाये