
न पास भाई की कलाई है
न हमने राखी भिजवाई है
फिर भी उत्साह में न कोई कमी है
हाँ आंखों में बस थोड़ी नमी है
इस बार हर त्योहार का बदला है कुछ ढंग
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग
भाई की लम्बी उम्र की कामना है
इस लिए तो अरमानो को थामना है
भाई दूर रहे या रहे पास
सही सलामत रहे यही है आस
बीत जाए ये महामारी फिर से होंगे संग
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग
राखी रेशम से हो या फिर हो मौली से बनी
बांध कर इसे भाई खुद को सम
Read More! Earn More! Learn More!
