वो काली रात

ना था कोई साथ

सुनसान सड़क पर

चलती गई चुप चाप


सामने से बाइक की आवाज

अकेला लड़का था उसमें सवार

दिल लगा धड़कने जोरों से

क्या अनहोनी लिखी है इस बार


साड़ी खबरे, साड़ी घटनायें

दिमाग मे लगी घुमने

एक के बाद एक उलटे सीधे

लगे मन में विचार आने


देख मुझे अकेला, वो दंग रहा

किनारे रोक, बाइक से आ खड़ा

दूर से बोला- ना ना घबरा ना

मैं भी किसी का भाई ठहरा


इतना सुन दिल शांत हुआ

पर दिमाग अभी भी घबरा रहा

सोच सोच परेशान हो रहा

क्यों कोई साथ अजनबी का दे रहा


साथ मैं तेरे चलता हूं

घर तक छोड़ तुझे देता हूं

सही नही ये रास्ता तुम्हारे लिए

भरोसा रखो कुछ क्षण के ही लिए


कुछ देर बाद मोड़ आया

वहां से घर मैंने पास पाया

शुक्रिया कर मन की बात कही

ख़ुशनसीब है वो बहन जिसको ऐसा भाई दिया...