जिसने जन्म दिया उसे बाहर छोड़ रहे

घर में मूर्ति ला, मां समझ पूज रहे

अपनों से मन मुटाव कर रहे

वेब की दुनिया में रिश्ते ढूंढ रहे ॥


रास्ते के भूखे से पीछा छुड़वा रहे

रेस्टोरेंट में पैसों की थैलियां उड़ा रहे

दूसरे की सफलता को छोटा समझ रहे

खुद आलस में डूब, बस सपने देख रहे ॥


एक ही असफल प्रयास से हार रहे

खुद को भीड़ में भी अकेला रख रहे

जलन, क्रोध, बदला- इनमें समय व्यर्थ कर रहे

खुद आलसी होकर असफलता का दोष भाग्य को दे रहे ॥


जागो ! होश में आओ ! रिश्तो की क़दर कर लो

मेहनत से अपनी लकीरें खुद खींच लो

खुद को भी दूसरों की जगह रख कर देख लो

आसमान छूने से पहले सीढ़ी खुद तैयार कर लो ॥