आज तुम्हारा तो कल मेरा होगा
पैसा है यह कभी ना अपना होगा ;
अपनो से पहले यह आता है
हर कोई इसमें खो जाता है ;
कभी लड़ाई इसके लिए हो जाती है
कभी जुदाई इसी से हो जाती है ;
गरीब इसके सपने देखता है
अमीर इसके साथ रहता है ;
पहले लोग इसे अपना बनाते हैं
फिर इसके नशे में मग्न हो जाते हैं ;
घर इसके बिना अधूरा है
लगता सब से यही प्यारा है ;
पैसा अपनों को दुश्मन बना देता है
जुबां होते हुए भी गूंगा बना देता है ;
दो से एक को अलग कर देता है
हर रिश्ते से मुक्त कर देता है ;
दूरियां बनाने में यह आगे है
हर इंसान इसके पीछे भागे है ;
किसी के पास कम तो किसी का ज्यादा है
इसे ही पाना हर एक का इरादा है ;
पैसा ज्यादा है तो हर एक खुश
कम हो तो बच्चे भी नाखुश ;
पर पैसा भाग्य नहीं बदल सकता
हर कुछ पैसों से नहीं खरीदा जा सकता ;
इंसान की पहचान पैसों से नहीं होती
कुछ खुशी तो बिना पैसों की ही मिलती ।
-Punam Kaur

